उतर के आ आसमा से ऐ खुदा तू भी कभी
बैठ मेरे साथ देख कैसी होती है ज़िन्दगी
देख कभी मुस्कुराहटों को आसुओं मे ढलते हुए
कभी देख आसुओं को मुस्कुराहटों में खिलते हुए
मिलेंगे क्या रंग इतने तेरी उस जन्नत मे ?
देख इंसान को लड़ते तेरी लिखी उस तक़दीर से ... या देख इंसान को लड़ते तेरी लिखी उस तक़दीर से
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