रोज़गार के नाम पर ज़मीन हमारी छीनली
दिखा के ख्वाब कई नीदें हमारी छीनली
यकीन करूं में किसपे सभी ने मुझे लूटा है
नारा चाहे कुछ भी हो वो बस पैसे का भूखा है
जनता की पार्टी हो या आम आदमी का हाथ
हर कोई बस देता है गरीब के पेट पे लात
हुआ करते थे समाज सेवी कभी नेता
आज कल तो बस समाज से सेवा है लेता
जागे नहीं आज तो जाने कहाँ हम होंगे
शायद फिर स्कूल में भ्रष्टाचार के पाठ होंगे