Monday, October 18, 2010

Life ......

उतर के आ आसमा से ऐ खुदा तू भी कभी
बैठ मेरे साथ देख कैसी होती है ज़िन्दगी
देख कभी मुस्कुराहटों को आसुओं मे ढलते हुए
कभी देख आसुओं को मुस्कुराहटों में खिलते हुए
मिलेंगे क्या रंग इतने तेरी उस जन्नत मे ?
देख इंसान को लड़ते तेरी लिखी उस तक़दीर से ... या देख इंसान को लड़ते तेरी लिखी उस तक़दीर से

Wednesday, October 6, 2010

Aarakshan ..

पिछड़ों को आगे करने का दम भारती है सरकार

फिर भी न जाने पिछड़ों की संख्या है बरक़रार

कभी आरक्षण तो कभी योजनाएँ कई

फिर भी न जाने क्यूँ इस्तिथि है वही

करती नहीं क्यूँ सरकार कुछ ऐसा

जाति नहीं आरक्षण की बुनियाद हो पैसा

पिछड़ों को चाहिये सम्मान समाज में

दूर करनी चाहिये दूरियां है जो दिल में